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ईद-ए-मिलादुन्नबी पर अमन-शांति का संदेश – डीजे और पटाखों से रहेगा परहेज़ : सोहेल सेठी

सीरतुन्नबी कमेटी की गुजारिश को शहर की मस्जिदों के मुतवल्ली ने दी सहमति
डीजे और आतिशबाजी से होगा पूर्ण बहिष्कार

New India News/CG इस्लामी परंपरा और अनुशासन को बनाए रखने के उद्देश्य से सीरतुन्नबी कमेटी की ओर से रखी गई गुजारिश को शहर की सभी मस्जिदों के मुतवल्ली और जिम्मेदारों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। समिति ने स्पष्ट रूप से अपील की थी कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म दिवस यानी ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर होने वाले जुलूस और कार्यक्रमों में डीजे तथा आतिशबाजी का प्रयोग न किया जाए। इस अपील को अब शहरभर के मुतवल्ली भाइयों ने अपनी सहमति प्रदान की है और वचन दिया है कि आगामी पर्व को पूरी गरिमा और अमन-ओ-शांति के साथ मनाया जाएगा।

कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि सीरतुन्नबी का संदेश इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारा और इंसाफ है। ऐसे में डीजे की तेज़ आवाज़ और पटाखों की आतिशबाजी न सिर्फ इस पवित्र संदेश की गंभीरता को कम करती है, बल्कि कई बार सामाजिक असुविधा और विवाद का कारण भी बन जाती है। इसलिए समिति की तरफ़ से पहले ही स्पष्ट किया गया था कि इस बार मिलादुन्नबी का जुलूस  केवल नात, दरूद शरीफ और इलाही तरानों के बीच ही संपन्न होंगे।

मुतवल्लियों ने भी एकमत से कहा कि धर्म और शरीयत के खिलाफ़ जाने वाली परंपराओं को रोकना ज़रूरी है। डीजे और आतिशबाजी न केवल इस्लामी तालीम के विपरीत है बल्कि आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब भी बनती है। उन्होंने कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम की याद में हमें उनकी सीरत और उनके बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियाँ करना जो उनके उसूलों के खिलाफ़ हों।

कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि इस निर्णय का मकसद जुलूस और धार्मिक कार्यक्रमों को पूरी तरह से आध्यात्मिक और इल्मी बनाना है, ताकि लोग सच्चे दिल से सीरतुन्नबी की सीख को अपनाएं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवा वर्ग के लिए ज़रूरी है कि वे सिर्फ़ दिखावे और शोरगुल से दूर रहकर हज़रत मोहम्मद साहब की जीवनशैली और उनकी शिक्षाओं को अपनाएं।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी इसे सराहा। उनका कहना है कि यह कदम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से सही है बल्कि समाज में अमन, भाईचारा और पारस्परिक सद्भाव को भी बढ़ावा देगा।

इस प्रकार सीरतुन्नबी कमेटी और शहर के मुतवल्लियों का यह सामूहिक फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल साबित होगा और समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुंचाएगा।

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