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“हमर छत्तीसगढ़” आसिफ इक़बाल की कलम से…

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नववर्ष 2022 को बैगा-आदिवासियों व श्रमिकों के साथ मनाया,,,,,

‘हमर छत्तीसगढ़’ में भी नववर्ष 2022 का स्वागत सभी ने अपने-अपने तरीके से हर्षोउल्लास के साथ किया लेकिन मुख्य मंत्री भूपेश बघेल ने सबसे अलग कबीरधाम ज़िले के बैगा-आदिवासी बाहुल्य बोड़ला विकासखंड के “चिल्फी” गाँव तथा रायपुर में असंगठित व सन्निमार्ण मजदूरों के बीच बेहद आत्मीयता से मनाया।चिल्फी में भूपेश बघेल के साथ कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे भी थे।मुख्यमंत्री-कृषि मंत्री के साथ चिल्फी से मनोरम व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र ‘सरोदादार पहुंचे,जहां बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने तिलक लगाकर अभिनन्दन किया।जबकि विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति के नर्तकों ने पारम्परिक वेशभूषा में नृत्यकर मुख्य मंत्री का स्वागत-सत्कार किया।पारम्परिक आदिवासी नृत्यों व सरोदादार के मनोरम-शांत माहौल से अभिभूत हुए।भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।इसके बाद मुख्यमंत्री यहां से राजधानी रायपुर के मजदूर भाई-बहनों के बीच पहुंचकर नया साल मनाया और मजदूरों के लाभ व हितों की सौगातों की घोषणा की।नववर्ष 2022 पर राज्य के श्रमवीरों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि भवन व अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत भगिनी प्रसूति सहायता योजना में सहायता राशि 10 हज़ार से बढ़ाकर 20 हज़ार करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता कर्मियों की मेहनत से छत्तीसगढ़ को लगातार तीसरी दफे देश के सबसे स्वच्छ राज्य का पुरस्कार मिला है। नववर्ष के लिए स्वच्छता कर्मियों को बधाई व शुभकामनाएं दी।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा श्रम के सम्मान को कॉंग्रेस की सरकार ने आगे बढ़ाया है।मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नववर्ष में बुजुर्गों,पुरोधा महापुरुषों के सपनों को साकार करना ही राज्य सरकार का संकल्प है।भूपेश बघेल ने यह भी बताया कि उद्योगों में कार्यरत मजदूरों की आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 कर दी गई है ताकि इससे 4 लाख मजदूरों को अतिरिक्त 2 वर्ष का लाभ मिल सके।निर्माण श्रमिक एवं दिव्यांग सहायता योजना और असंगठित कर्मकार एवं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिक एवं असंगठित कर्मकार की मृत्यु पर 1 लाख एवं दिव्यांगता पर 50 हज़ार की राशि दी जा रही हैJ।विभिन्न योजनाओं में 16 लाख श्रमिकों को लगभग 284 करोड़ की सहायता पंहुचाई गई है।

इस दफे आशा बढ़ी है,,बस्तर का दंतेवाड़ा ज़िला ‘लाल आतंक’ से मुक्त हो सकेगा,,?
लगभग आधा हज़ार नक्सली सरेंडर कर चुके हैं और अब’शहीद महेंद्र करमा कालोनी’में एक साथ रहने वाले हैं,,,,,,

‘हमर छत्तीसगढ़’अन्य राज्यों सहित ऐसा अकेला राज्य नहीं है जहां “लाल आतंक”के खूनी जाल से मुक्ति की छटपटाहट न हो।बरसों से छत्तीसगढ और उसकेसीमावर्ती पडौसी राज्यों में रेड कॉरिडोर बना हुआ है।केंद्र सरकार से लेकर कईं राज्य सरकारों ने सुरक्षा बलों के सहारे लाल आतंक से मुक्ति का प्रयास किया।जिसमें कहीं कोई सफलता नहीं मिल पाई,जबकि बड़ी संख्या में बड़े कैडर से लेकर आमजनों सहित सैकड़ों पुलिस कर्मियों की शहादतें हो चुकी हैं।इसी दौरान 2020 में दंतेवाड़ा ज़िले में पुलिस को अचूक रास्ता मिल गया,जिसे ‘लोन वर्राटू’ अर्थात ‘घर वापस आईए’ अभियान का सकारात्मक मार्ग माना जाने लगा और जिसमें बड़ी सफलताएँ मिलती गई क्योंकि इसका मूल उद्देश्य रहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाए।इस अभियान से अब तक करीब 480 नक्सलियों ने सरेंडर किया,जिनमे छोटे से बड़े इनामी शामिल हैं।इसी आधार पर पुलिस का दावा है कि वर्ष 2022 के अंत तक इलाका नक्सली मुक्त हो जावेगा।यह भी बताया जा रहा है कि नक्सल पीड़ित परिवार और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए बने शहीद महेंद्र करमा कालोनी के इन आवासों का लोकार्पण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संभवतः गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2022 पर किया जा सकता है। यह छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भविष्य में “मील का पत्थर” साबित होगा।यहां गौरतलब है कि इन 480 आत्मसमर्पित नक्सलियों में 416 पुरुष तथा 64 नक्सली महिलाएं शामिल हैं।जिनमें 120 ऐसे इनामी नक्सली भी हैं जिनपर 02 करोड़05 लाख तक के इनामी नक्सली हैं।इन तथ्यों से ज़ाहिर होता है कि पूरे देश में सरेंडर करने वाले नक्सलियों व नक्सल पीड़ित परिवारों के एक साथ आवास-परिसर में रहने देने वाला दंतेवाड़ा ज़िला पहला हो जावेगा,जहां एक ही परिसर में आवास व रोजगार की सुविधा भी मिल सकेगी।(पुलिस सूत्रों एवं पत्रकार चंद्रशेखर अग्रवाल की ख़बर पर आधारित)।इसी घटनाक्रम के समानांतर यह बात भी वायरल हो रही है कि सुकमा के चिंता गुफा थाना क्षेत्र के करी गुंडम में सुरक्षा बल का कैंप खुलने के बाद पहली दफे 2 लाख के इनामी समेत 44 नक्सलियों ने सरेंडर किया।इन नक्सलियों ने पुलिस अफसरों के सामने अपने हथियार डाले।नक्सलियों ने भरोसा दिलाया है कि वो अब कभी किसी नक्सली वारदात में शामिल नहीं होंगे।

छत्तीसगढ़ का”हरा,, सोना(तेंदूपत्ता)”फिर चमका,2022 की पहली निविदा से मिले रिकार्ड 914 करोड़ रुपए,,,,,,,,

‘हमर छतीसगढ़’ के वन आधारित लघु वनोपजों में तेंदूपत्ता को “हरा सोना” माना जाता है और लघु वनोपजों में तेंदूपत्ता का शिखर स्थान है।तेंदूपत्ता संग्रहण में इस वर्ष 2022 की पहली निविदा में ही 68 फीसदी मात्रा के विक्रय से बीते 4 सालों में रिकार्ड कुल 914 करोड़ रूपए मिले हैं।लघु वनोपजों के विक्रय व इसके संग्राहकों को अधिक पारिश्रमिक देने की मंशा हमेशा से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की रही है।इसी के अनरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण में बेस्ट क्वालिटी का खास ध्यान रखा गया।तेंदूपत्ता संग्राहकों ने भी उच्च क्वालिटी का खास ध्यान रखा ताकि उन्हें मजदूरी भी अधिक से अधिक मात्रा में मिल सके।बीते वर्षों की तरह इस साल भी तेंदूपत्ता की मांग अधिक रही है।

इसी मांग के आधार पर विक्रय-दर में बढोत्तरी की गई थी।जिसके बाद वर्ष 2022 में तेंदूपत्ता संग्रहण की प्रथम निविदा निकाली गई थी,जिसमें देश भर के 174 निविदाकारों ने प्रथम निविदा में भाग लिया था।निविदा तय करने के लिए वन मंत्री मोहम्मद अकबर की अध्यक्षता में वनोपज राजकीय व्यापार अंतर्विभागीय समिति की बैठक हुई थी। बैठक में तय किया गया कि 68 फीसदी मात्रा का तेंदूपत्ता विक्रय किया जावे।इस प्रथम निविदा से 68 फीसदी मात्रा के तेंदूपत्ता संग्रहण के विक्रय पर बीते 4 वर्षों के मुकाबले रिकार्ड 914 करोड़ में विक्रय किया गया।उक्त बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन के प्रमुख वन सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन-बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी,प्रबंध संचालक व राज्य लघु वनोपज संघ के संजय शुक्ला,वन सचिव प्रेमकुमार सहित वन विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।वन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक,तेंदूपत्ता संग्रहण के प्रथम निविदा से वर्ष 2021 में 62 फीसदी विक्रय से 704 करोड़,वर्ष 2020 में 18 फीसदी से 172 करोड़ तथा वर्ष 2019 में 25 फीसदी से 240 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2022 में 68 फीसदी विक्रय की निविदा से रिकार्ड 914 करोड़ रुपए मिले।

घातक संक्रमण की सटीक जांच के लिए “जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की सुविधा की केंद्र सरकार से ठोस मांग की टी,एस,सिंहदेव ने,,,,,,,,

‘हमर छत्तीसगढ़’ के स्वास्थ्य मंत्री टी,एस,सिंहदेव ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मण्डाविया को लेटर भेजकर छत्तीसगढ़ में “जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि घातक संक्रमणों की जांच जल्द बेहतर गति से की जा सके।श्री सिंहदेव ने आगे लिखा है कि जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए सैंपलों को वर्तमान में ओडिसा के भुवनेश्वर भेजना होता है,जिसमें काफी समय व्यर्थ जाता है।जांच भी धीमी चाल से होती है।इन सभी कारणों से राज्य में घातक वेरियंट ओमिक्रोन,डेल्टा या अन्य संक्रमणों से बचाव,रोकथाम व इलाज का निर्णय लेने में बड़ी असुविधा होती है।श्री सिंहदेव ने लिखा है कि यदि रायपुर के “एम्स” में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा आर्थिक व ज़रूरी तकनीक सहयोग की अपेक्षा के साथ उपलब्ध कराया जाए।इससे छत्तीसगढ़ में घातक संक्रमणों के इलाज व जांच समय पूर्व हो सके।

नए साल की बड़ी सुखद–सार्थक खबर,,,,,,,

‘हमर छत्तीसगढ़’ के लिए नया साल बड़ी सुखद खबर लेकर आया है।बिलासपुर के सेंट्रल जेल में निरुद्ध कैदियों के 8 बच्चों को बिलासपुर के प्रतिष्ठित स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया है।ये सार्थक पहल की है,बिलासपुर संभाग के कमिश्नर डॉ संजय अलंग ने,डॉ अलंग ने ये पहल इसीलिए की ताकि अपने पालको के संग जेलों में रह रहे इन 6 से 13 वर्ष के 4 बालकों व 4 बालिकाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।गौरतलब है कि जब डॉ अलंग बिलासपुर के कलेक्टर थे,तब भी उन्होंने जेल के मुक्ताकाश व जेल परिसर में निरुद्ध व जेल में बंद अपने पालकों के साथ रहने वाले बच्चों को अच्छे स्कूलों में प्रवेश दिलाने की पहल शुरू की थी।इन बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के इसी क्रम को बढ़ाते हुए फिर सार्थक पहल की गई है।खास बात यह है कि इन 8 बच्चों को बिलासपुर के उत्कृष्ट स्कूलों में प्रवेश दिलाने से जेल के कैदी-पालकों मेंआनन्द व खुशी का माहौल है।इन कैदी-पालकों को अब विश्वास हो चला है कि उनके बच्चे समाज की मुख्य धारा से जुड़कर उनके व अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे।कमिश्नर डॉ अलंग की पहल व उद्देश्यों की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है।

लिटिल स्टार सहदेव विरदो अब स्वस्थ,,,,,,

बस्तर के लिटिल स्टार सिंगर सहदेव विरदो,सर्जरी व बेहतर इलाज के बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया है।गौरतलब है कि ” बचपन का प्यार” और प्रसिद्ध सिंगर बादशाह के संग गाकर फेमस हुए बस्तर के सहदेव विरदो बीते दिनों सुकमा में दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल हो गए थे।सहदेव को बेहतर इलाज के वास्ते राजधानी के बालाजी अस्पताल में दाखिल किया गया था।डॉ देवेंद्र नायक ने बताया कि सहदेव की बालाजी अस्पताल में फ्रेक्चर व सिर व आँख के पास खून के जमे थक्के का इलाज किया गया,जिससे उसे बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिला।बताया जा रहा है कि इस दौरान फेमस सिंगर बादशाह व उनकी पूरी टीम सहदेव के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करती रही है।

“कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर अपना व दूसरों का जीवन सुरक्षित करें।
‘मास्क ज़रूर पहने,सामाजिक दूरी बनाए रखें भीड से बचें,,,”

मशहूर शायर डा,के के रिषी ने फरमाया है

“मौत पर तो बस नहीं है दोस्तों,,,,
ज़िंदगी को अपने बस में कीजिए”,,,,

 

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