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महंगे इलाज से मिली मुक्ति: माँ पद्मावती हॉस्पिटल का महा-शिविर ग्रामीणों के लिए बना वरदान

News India News / CG राजधानी रायपुर से सटे ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। महंगे इलाज, जांचों का भारी खर्च और शहर तक आने-जाने की मजबूरी के कारण ग्रामीण परिवार अक्सर बीमारियों को नजरअंदाज करने को मजबूर हो जाते थे। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। पचेड़ा स्थित माँ पद्मावती हॉस्पिटल द्वारा आयोजित 15 दिवसीय निःशुल्क महा-चिकित्सा शिविर ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है।

अस्पताल की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर लगाए गए इस शिविर ने अब तक मिली जानकारी के अनुसार 4000 से अधिक मरीजों को सीधा लाभ पहुंचाया है। यह शिविर श्री बालाजी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स एंड कॉलेजेस की सामाजिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।

महंगे टेस्ट से राहत, जेब पर नहीं पड़ा बोझ

आमतौर पर एमआरआई, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी और अन्य पैथोलॉजी जांचों के लिए ग्रामीणों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कई बार तो आर्थिक तंगी के कारण मरीज जरूरी जांच तक नहीं करा पाते। इस महा-शिविर में इन सभी जांचों को पूरी तरह निःशुल्क कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई है। अस्पताल परिसर को पूरी तरह कैश काउंटर मुक्त रखा गया है, जिससे पंजीकरण, जांच, दवाइयों और यहां तक कि जटिल ऑपरेशनों के लिए भी मरीजों को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार शिविर के पांचवें दिन ही सैकड़ों लोगों ने लाभ उठाया। लगभग 340 लोगों की रक्त जांच, 20 लोगों की सोनोग्राफी, 18 लोगों का सीटी स्कैन, 155 लोगों का ईसीजी और 23 लोगों का इको टेस्ट किया गया। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की स्वास्थ्य पहल की कितनी अधिक आवश्यकता थी।

शहर जाने की मजबूरी हुई खत्म

बेहतर इलाज के लिए शहर जाना अब ग्रामीणों के लिए अनिवार्यता नहीं रह गई है। पचेड़ा में स्थापित 750 बिस्तरों वाला यह सर्व-सुविधायुक्त अस्पताल आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से लैस है। इससे ग्रामीणों को न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि यात्रा और ठहरने के खर्च से भी मुक्ति मिली है।

शिविर में पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि जिन जांचों और इलाज की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, वे अब उनके गांव के पास ही बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध हो रहे हैं। एक लाभार्थी ग्रामीण ने भावुक होकर कहा,

“हमें शहर के बड़े अस्पतालों में जाने से डर लगता था कि बहुत पैसा लगेगा, लेकिन माँ पद्मावती हॉस्पिटल ने हमारे गांव के पास ही मुफ्त में बड़े-बड़े टेस्ट करके हमें नया जीवन दिया है।”

ग्रामीण स्वास्थ्य क्रांति की ओर मजबूत कदम

यह महा-शिविर केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता और भरोसे का एक मजबूत आधार बन गया है। ऐसे प्रयास न केवल बीमारियों के समय पर इलाज में मदद करते हैं, बल्कि ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य की ओर भी ले जाते हैं।

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