नाबालिग लड़कियों के साथ गिरफ्तारी के बाद मचा था सियासी भूचाल, अब जांच पर टिकी निगाहें
Newindianews/CG छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार की गईं दो ननों को एनआईए कोर्ट, बिलासपुर ने बड़ी राहत दी है। शनिवार को अदालत ने दोनों आरोपित ननों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन चुका था और राज्य से लेकर दिल्ली तक इसकी गूंज सुनाई दे रही थी।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि दोनों ननें नारायणपुर जिले की दो नाबालिग लड़कियों को लेकर दुर्ग पहुंची थीं, जहां पुलिस और स्थानीय लोगों की सूचना पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। धारा 370 (मानव तस्करी), 295A (धार्मिक भावनाएं भड़काने), और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं उन पर लगाई गईं थीं। आरोप है कि ननों ने लड़कियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया और उन्हें राज्य से बाहर भेजने की योजना बना रही थीं।
कोर्ट में पेशी, फिर फैसला सुरक्षित
शुक्रवार को दोनों ननों को एनआईए कोर्ट, बिलासपुर में पेश किया गया। जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक साक्ष्य और तफ्तीश को ध्यान में रखते हुए आरोपी ननों को निजी मुचलके पर जमानत दी जा रही है, लेकिन उन्हें जांच में सहयोग देना होगा और बिना अनुमति राज्य छोड़ने की इजाजत नहीं दी गई है।
सियासी हलचल: कांग्रेस का विरोध, बीजेपी का जवाब
इस मामले ने राज्य में राजनीतिक हलचल तेज कर दी। कांग्रेस पार्टी ने इसे भाजपा सरकार की “धार्मिक असहिष्णुता” करार दिया और संसद में इस मुद्दे को उठाया। इसके साथ ही INDIA गठबंधन के कई सांसद और नेता दुर्ग जेल पहुंचकर ननों से मिले और इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया।
वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “राज्य में जबरन धर्मांतरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया था कि ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
जांच जारी, अगली सुनवाई पर सबकी नजरें
भले ही फिलहाल दोनों ननों को अदालत से राहत मिल गई है, लेकिन मामले की जांच अब भी जारी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, और लड़कियों के बयान जैसे कई अहम सुरागों पर काम किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने पुख्ता हैं।
इस बीच, ननों की गिरफ्तारी के विरोध में ईसाई संगठनों और मिशनरी संस्थानों ने भी अपनी आवाज उठाई है और इसे “धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन” करार दिया है। दूसरी ओर, हिंदू संगठनों ने इस गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की है ताकि धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
निष्कर्ष: कानून और राजनीति आमने-सामने
फिलहाल, यह मामला छत्तीसगढ़ में कानून बनाम राजनीति की एक बड़ी मिसाल बनता जा रहा है। कोर्ट का फैसला आने के बाद भले ही एक अस्थाई शांति दिख रही हो, लेकिन आने वाली अगली सुनवाई और पुलिस की चार्जशीट पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
