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सोहेल सेठी बदलेंगे सीरत कमेटी की सीरत और सूरत’

सोहैल सेठी की दावेदारी से मुस्लिम समुदाय में उत्साह, युवा बोले – यही हैं बदलाव के असली हक़दार

Newindianews/CG  राजधानी रायपुर में इन दिनों सीरत कमेटी के आगामी चुनाव को लेकर जबरदस्त माहौल बना हुआ है। मुस्लिम समुदाय के बीच यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सिर्फ एक पद नहीं बल्कि समुदाय के विकास, नेतृत्व और भविष्य को दिशा देने वाला चुनाव होता है। इस बार सदर पद के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन इनमें सबसे अधिक चर्चा शहर के नामी बिजनेसमैन और समाजसेवी सोहैल सेठी की हो रही है, जिन्होंने हाल ही में अपना नामांकन दाखिल किया है।

सोहैल सेठी कोई नया नाम नहीं हैं। रायपुर शहर की गली-गली में उनकी पहचान एक सफल व्यवसायी के साथ-साथ एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है। उन्होंने बीते कई वर्षों में ना सिर्फ व्यापार में अपना नाम बनाया है, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए कई योजनाएं और सहायता अभियान चलाकर लोगों के दिलों में जगह बनाई है।

मुस्लिम युवाओं के बीच सोहैल सेठी की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय युवाओं का मानना है कि अब तक जितने भी सदर बने हैं, उन्होंने समुदाय की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास जरूर किया, लेकिन व्यापक बदलाव नहीं ला सके। “अब समय है कि हम ऐसे नेतृत्व को चुनें जो केवल पद के लिए नहीं, बल्कि कौम के लिए काम करे,” पत्रकार आदिल अहमद से संवादाता के पूछने पर बताया की सोहैल सेठी में वह काबिलियत और सोच है जो सीरत कमेटी की ‘सीरत और सूरत’ दोनों बदल सकती है।

सोहैल सेठी के समर्थकों का दावा है कि वे बीते वर्षों में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला चुके हैं। उन्होंने स्किल डिवेलपमेंट, स्वरोजगार, और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में युवा मुस्लिमों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

सोहैल सेठी की सोच आधुनिक है, लेकिन वे अपने समुदाय की धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति भी पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने कहा, “सीरत कमेटी केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। ये जिम्मेदारी है हमारे बुज़ुर्गों के आदर्शों को निभाने की और युवाओं के सपनों को साकार करने की।”

मुस्लिम समुदाय के बुजुर्ग भी इस बार बदलाव के पक्ष में नज़र आ रहे हैं। उनका कहना है कि सोहैल सेठी जैसे पढ़े-लिखे और दूरदर्शी सोच वाले व्यक्ति का नेतृत्व समुदाय को एक नई दिशा दे सकता है। वहीं महिलाएं भी उनके काम से प्रभावित नज़र आती हैं। “सोहैल भाई ने हर वर्ग के लोगों की सुनवाई की है। हमें भरोसा है कि वे महिलाओं और बच्चियों के लिए भी खास योजनाएं लाएंगे,” एक महिला मतदाता ने कहा।

रायपुर की सीरत कमेटी के चुनाव को लेकर यह साफ हो चुका है कि इस बार मुकाबला सिर्फ चेहरों का नहीं, बल्कि सोच का भी है। जहां कुछ उम्मीदवार परंपरागत तरीके से प्रचार में जुटे हैं, वहीं सोहैल सेठी का फोकस संवाद, मुद्दों और योजनाओं पर है।

चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सोहैल सेठी की सक्रियता और जनसमर्थन बढ़ता दिख रहा है। अगर यह लहर इसी तरह जारी रही, तो ऐसा माना जा रहा है कि रायपुर की सीरत कमेटी को इस बार एक ऐसा नेतृत्व मिलेगा जो वाकई बदलाव की शुरुआत कर सकता है।

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