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रमन सिंह सहित उनके घूसखोर मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो

Newindinaews/CG अदालत ने इंदिरा बैंक घोटाले के जांच को जारी रखने के आदेश दिये है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इससे न्याय की उम्मीद जगी है। कांग्रेस पार्टी शुरूआत से ही इंदिरा बैंक के खातेदारों को न्याय दिलाने के लिये संघर्षरत है। हमारा इरादा इस मामले के दोषियों को सजा दिलाने का है। हमारे लिये यह राजनीति का विषय नहीं है और न ही राजनैतिक बदला भांजने का अवसर है इम चाहते है दोषी कोई भी हो कितना भी रसूखदार क्यों न हो सजा जरूर मिलना चाहिये। खातेदारो का पैसा वापस हो हमारा उद्देश्य है। इंदिरा बैंक घोटाले की बड़ी रकम जो करोड़ो में है भाजपा के बड़े नेताओं के पास घूस के रूप में पहुंची। भाजपा के घूसखोर नेताओं से इस रकम की वसूली की जानी चाहिये। इंदिरा बैंक घोटाले में गरीबो को न्याय देना कांग्रेस का लक्ष्य है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले में बैंक में लगभग 22000 गरीब खातेदारो को पैसे का बंदर बांट बैंक के पदाधिकारियों और अधिकारियो ने किया था। इस बंदरबांट की रकम तत्कालीन सरकार में शीर्ष पर बैठे हुये लोगो तक भी पहुंची थी।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस मामले में जांच के दौरान पुलिस ने अदालत से आरोपी बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा का नार्को टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। अदालत की अनुमति से आरोपी का नार्को टेस्ट कराने के लिये पुणे लेबोट्री ले जाया गया जहां पर लेबोट्री की शर्तो के अनुसार आरोपी की सहमति आवश्यक थी वहां पर आरोपी ने नार्को टेस्ट की सहमति नहीं दिया। बिना टेस्ट कराये उसे वापस ले आया गया। उसके बाद फिर से बेंगलुरू लेबोट्री में आरोपी को ले जाया गया जहां पर नार्को टेस्ट के लिये आरोपी की सहमति आवश्यक नहीं थी आरोपी का टेस्ट हुआ। इस नार्को टेस्ट में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने भाजपा नेताओं को पैसा दिया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि “इंदिरा बैंक घोटाले में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा तत्कालीन सरकार के ऊपर से नीचे तक गया था। नार्को टेस्ट में बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा ने नार्को टेस्ट में बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को 1 करोड़, तत्कालीन गृह मंत्री रामविचार नेताम को 1 करोड़, तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को 2 करोड़, मंत्री राजेश मूणत को 1 करोड़, अमर अग्रवाल को 1 करोड़ तथा तत्कालीन डीजीपी को 1 करोड़ रू. घूस देने का खुलासा किया था। उसने नार्को टेस्ट में बताया है कि बैंक की अध्यक्ष रीता तिवारी के कहने पर उसने लाल, नीले और काले रंग के एडीडास कंपनी के बैग में रकम इन नेताओं के यहां पहुंचाया था।” इसलिये रमन सरकार के समय पुलिस ने लेब से नार्को टेस्ट की अधिकृत सीडी लेकर साक्ष्य के रूप में अदालत में जमा ही नहीं किया था ताकि रसूखदार नेताओं को बचाया जा सके।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि परिसमापक इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैक द्वारा प्रकरण सी.बी.आई.को सौपने हेतु पंजीयक सहकारी संस्था के द्वारा शासन को पत्र क्रमांक/परि./स्था./2009-10 दिनांक 24/12/2009 लिखा गया था। पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने भी छत्तीसगढ़ पत्र क्रमांक/साख-3/नाग0 बैंक/2010/483 रायपुर दिनांक 04.02.2010 के द्वारा सचिव छत्तीसगढ़ शासन सहकारिता विभाग मंत्रालय रायपुर को इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक मर्या0 रायपुर में हुये 54 करोड़ के गबन/घोटाले से संबंधित प्रकरण सी.बी.आई. को सौंपने की अनुशंसा की गयी थी लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह एवं मंत्रियों को बचाने के लिये सीबीआई जांच की यह अनुशंसा नहीं मानी गयी। अदालत के ताजा फैसले के बाद एक बार फिर से न्याय की नई उम्मीद जगी है, गुनाहगारों को सजा मिलेगी।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि आरोपी उमेश सिन्हा के नार्को टेस्ट के आधार पर मुख्यमंत्री रमन सिंह मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, रामविचार नेताम, अमर अग्रवाल, को भी इंदिरा बैंक घोटाले का सह अभियुक्त बनाया जाये।

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