New India News : बांग्लादेश में हालिया दिनों में मज़हब के नाम पर अल्पसंख्यक तबक़ों के ख़िलाफ़ भीड़ द्वारा हिंसा, मोब लिंचिंग और बेगुनाह लोगों को ज़िंदा जलाने जैसी अमानवीय घटनाओं का सामने आना निहायत ही अफ़सोसनाक, शर्मनाक और पूरी इंसानियत को झकझोर देने वाला है।
सीरत कमेटी के सदर सोहेल सेठी ने इन घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की बर्बरता न किसी मज़हब की तालीम हो सकती है और न ही किसी सभ्य समाज की पहचान।
उन्होंने कहा कि इस्लाम कभी भी कमज़ोरों, अल्पसंख्यकों या बेगुनाह इंसानों पर ज़ुल्म की इजाज़त नहीं देता। जो लोग ऐसी घिनौनी और कायराना हरकतों में शामिल हैं, वे न इंसानियत के पैरोकार हैं और न ही इस्लाम की सच्ची रूह और उसकी बुनियादी तालीम को समझने वाले हैं।
सोहेल सेठी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत का हर अमन-पसंद मुसलमान इस ज़ुल्म, नफ़रत और हिंसा के ख़िलाफ़ है और अपने हिंदू भाइयों सहित तमाम पीड़ित अल्पसंख्यक समुदायों के साथ पूरी मज़बूती और एकजुटता के साथ खड़ा है।
उन्होंने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से पुरज़ोर मांग की कि
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बांग्लादेश सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाकर दोषियों को फ़ौरन गिरफ़्तार किया जाए और उन्हें सख़्त सज़ा दी जाए।
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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के ज़रिये इन घटनाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच कराई जाए।
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पीड़ित परिवारों की हिफ़ाज़त, मुआवज़ा, पुनर्वास और इंसाफ़ को यक़ीनी बनाया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले तमाम ओलेमा-ए-किराम से अपील की कि वे भी इन ज़ुल्मी और अमानवीय घटनाओं के ख़िलाफ़ खुलकर और पूरी ताक़त के साथ अपनी आवाज़ बुलंद करें।
सोहेल सेठी ने यह भी चेतावनी दी कि कुछ कट्टरपंथी तत्व इन घटनाओं के बहाने भारत में आपसी भाईचारे को नुकसान पहुँचाने और तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को साफ़ संदेश देते हुए उन्होंने कहा—
“हम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ, ख़ुद ज़ालिम न बनें। इंसाफ़ की लड़ाई नफ़रत से नहीं, बल्कि अमन, समझदारी और इंसानियत से लड़ी जाती है।”
अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अफ़वाहों, उकसावे और नफ़रत भरे प्रचार से बचते हुए अमन, इंसाफ़ और इंसानियत को मज़बूत करें, क्योंकि यही हर मज़हब की बुनियादी तालीम और सच्चा पैग़ाम है।
