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भारत के राष्‍ट्रपति को मिलता है विशेषाधिकार… कौन-सी शक्तियां उन्हें बनाती हैं खास?

Newindianews/Delhi: एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर देश की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गईं। अब रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति हैं। उनका कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ लेंगी।

द्रौपदी मुर्मू को देश की राष्ट्रपति के रूप में वास्तव में क्या लाभ मिलेगा, उन्हें कितना भुगतान किया जाएगा? अक्टूबर 2017 से राष्ट्रपति का मासिक वेतन 1.5 लाख से बढ़कर 5 लाख प्रति माह हो गया है। उन्हें चिकित्सा और आवास सहित सभी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति को डेढ़ लाख रुपये मासिक पेंशन भी मिलती है।

भारत के राष्ट्रपति : ‘प्रथम नागरिक’ के विशेषाधिकार

5 लाख मासिक वेतन। (शुल्क माफ़)

निःशुल्क चिकित्सा उपचार, जांच सहित सभी सुविधाएं।

राष्ट्रपति की विशेष कार। (कस्टम निर्मित मर्सिडीज बेंच 600)

राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों के वेतन के लिए भी बड़ी राशि आवंटित की जाती है।

1.5 लाख प्रति माह सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन के रूप में।

दो लैंडलाइन और एक मोबाइल फोन मुफ्त।

व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड सहित सुरक्षा प्रणाली।

साथी के साथ मुफ्त हवाई और ट्रेन यात्रा।

25 जुलाई को शपथ लेंगी द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति चुनाव जीतकर द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनीं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी यशवंत सिन्हा को हराया। द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी समुदाय की पहली भारतीय हैं जो भारत की राष्ट्रपति बनीं। मतगणना शुक्रवार सुबह 11 बजे से शुरू हो गई। पिछले सोमवार को देश भर में राष्ट्रपति चुनाव के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान हुआ था। कल यानी 21 जुलाई को रिजल्ट आया था। रामनाथ कोविंद अब राष्ट्रपति हैं, उनका कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ लेंगे।

ये शक्तियां बनाती हैं उन्हें औरों से अलग
राजनीतिक शक्ति: राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के दो व्यक्तियों को मनोनीत कर सकते हैं. राज्यसभा में कला, साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान, आदि में पर्याप्त अनुभव रखने वाले 12 सदस्यों को भी वे मनोनीत कर सकते हैं. दूसरे देशों के साथ कोई संधि या समझौता किया जा रहा है तो यहां राष्ट्रपति का हस्ताक्षर जरूरी होता है.

अध्यादेश जारी करने का अधिकार: जब संसद के दोनों सदनों में सत्र नहीं चल रहा होता, उस समय संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक, राष्ट्रपति नया अध्यादेश जारी कर सकते हैं. संसद सत्र के शुरू होने के 6 हफ्ते तक इसका प्रभाव रहता है.

फांसी से क्षमादान की शक्ति: संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी व्यक्ति को क्षमा कर उसे पूर्ण दंड से बचा सकते हैं या फिर उसकी सजा कम करवा सकते हैं. हालांकि एक बार यदि उन्होंने क्षमा याचिका रद्द कर दी तो फिर दुबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती. फांसी की सजा पाने वाले कई अपराधियों की क्षमा याचिका राष्ट्रपति तक पहुंचती है. हालांकि इस पर फैसला लेना उनका अधिकार है.

आपातकाल लगाने की शक्ति:देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास ही होता है. इसमें 3 तरह की इमरजेंसी शामिल होती हैं. पहला, युद्ध या सशस्त्र विद्रोह के दौरान, दूसरा राज्यों के संवैधानिक तंत्र के फेल होने पर और तीसरा वित्तीय आपातकाल. बता दें कि 1962 में भारत चीन युद्ध, 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध और फिर 1975 में इंटरनल एग्रेशन के दौरान देश में इमरजेंसी लगाई गई थी.

कानून बनाने की शक्ति:संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में कोई बिल जब पेश किया जाता है तो वहां से पास होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति जरूरी होती है. इसके बिना कोई भी विधेयक कानून नहीं बन सकता. धन विधेयक हो, किसी नए राज्य का निर्माण, सीमांकन हो या भूमि अधिग्रहण के संबंध में कोई विधेयक, राष्ट्रपति की सिफारिश के बगैर संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.

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