New India News/Delhi
SEC ने ई-मेल के जरिए समन भेजने की मांगी कोर्ट से अनुमति
अमेरिका की बाजार नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अरबपति कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के मामले में बड़ा कदम उठाया है। SEC ने एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट से अनुरोध किया है कि उसे दोनों आरोपियों को ई-मेल के माध्यम से सीधे समन भेजने की अनुमति दी जाए।
SEC का कहना है कि बीते करीब 14 महीनों से भारत सरकार के सहयोग के अभाव में वह अडानी परिवार तक कानूनी समन नहीं पहुंचा पा रही है। भारत के कानून एवं न्याय मंत्रालय के जरिए दो बार औपचारिक रूप से समन भेजने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों ही प्रयास विफल रहे।
750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड ऑफर से जुड़ा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SEC के वकील क्रिस्टोफर एम. कोलोराडो ने 21 जनवरी 2026 को अदालत को भेजे पत्र में बताया कि लगभग 14 महीने पहले गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ आरोप दायर किए गए थे। यह मामला 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड ऑफर से जुड़ा है, जिसके तहत अमेरिकी निवेशकों से करीब 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे।
SEC का दावा है कि अडानी परिवार ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों को खारिज किया है और अमेरिका की प्रतिष्ठित लॉ फर्म्स को भी अपनी पैरवी के लिए नियुक्त किया है, इसके बावजूद समन स्वीकार नहीं किया जा रहा।
हेग कन्वेंशन के तहत भारत ने नहीं किया सहयोग
SEC के अनुसार, भारत का कानून और न्याय मंत्रालय हेग कन्वेंशन के तहत समन सर्व कराने में दो बार सहयोग करने से इनकार कर चुका है।
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फरवरी 2025 में पहली बार SEC का अनुरोध तकनीकी कारणों का हवाला देकर लौटा दिया गया।
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इसके बाद दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने यह कहते हुए फाइल वापस कर दी कि SEC के नियम इस तरह के समन को कवर नहीं करते।
भारत में हेग कन्वेंशन के तहत विदेशी कानूनी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स की होती है।
अमेरिकी एजेंसियों के गंभीर आरोप
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि 2020 से 2024 के बीच भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए करीब 250 मिलियन डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी गई।
यह भी आरोप है कि इन सौदों से जुड़ी अहम जानकारियां अमेरिकी निवेशकों से छुपाई गईं और उन्हें गुमराह किया गया।
हालांकि, अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। समूह का कहना है कि वह कॉरपोरेट गवर्नेंस और सभी नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करता है।
