नवा छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार : सुपोषण की ओर बढ़ता बलौदाबाजार-भाटापारा

Newindianews/Raipur: बच्चों में कुपोषण एक अत्यंत ही गंभीर स्थिति मानी जाती है । इससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है तथा इसके कारण शिशु मृत्यु दर भी बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में शासन द्वारा जिला बलौदा बाजार में पोषण पुनर्वास केंद्रों का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए गंभीर रूप से कुपोषण से पीड़ित बच्चों को इससे निकालने हेतु प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एमपी महेश्वर ने बताया कि वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसडोल तथा पलारी में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।वास्तव में पोषण पुनर्वास केंद्र एक सुविधा आधारित इकाई है जहां 5 वर्ष से कम एवं गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को पोषण सुविधा प्रदान की जाती है साथ ही बच्चे के पालकों को आवश्यक देखभाल तथा खान-पान संबंधित कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाता है जिससे वह घर पर भी अपने बच्चों को कुपोषण से दूर करने का प्रयास कर सकें। दोनों ही पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बिस्तरों पर संचालित हैं।

कसडोल केंद्र की फीडिंग डिमांस्ट्रेटर भारती लहरे ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती हेतु बच्चों के लिए कुछ मापदंड निर्धारित किए गए हैं । इसके अंतर्गत यदि 6 माह से कम उम्र का शिशु अत्यंत कमजोर हो ,वह प्रभावी ढंग से दूध पी नहीं पा रहा हो या 45 सेंटीमीटर से ज्यादा लंबाई के बच्चे का वजन लंबाई अनुसार ना हो, गंभीर सूखापन दिखाई दे या फिर दोनों पैरों में सूजन हो जबकि 6 माह से लेकर 60 माह तक के बच्चों के लिए ऊंचाई के अनुसार वजन, ऊपरी बांह के मध्य भाग की गोलाई 11.5 सेंटीमीटर से कम हो अथवा दोनों पैरों में सूजन हो यह मापदंड निश्चित किये गए हैं। ऐसी स्थिति के बच्चों को तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती की आवश्यकता होती है। कसडोल केंद्र वर्ष 2016 से स्थापित है तथा यहां अब तक 843 बच्चे भर्ती किए जा चुके हैं जिनमें से 305 गंभीर कुपोषित पाए गए हैं। इसी तरह पलारी केंद्र की फीडिंग डिमांस्ट्रेटर अर्चना वर्मा के अनुसार हर पोषण पुनर्वास केंद्र में डाइट चार्ट के आधार पर बच्चों को आहार दिया जाता है ।

यह डाइट चार्ट सप्ताह के 7 दिनों के लिए अलग-अलग प्रकार से बनाया गया है ताकि भोजन में नवीनता और रुचि बनी रहे। पलारी केंद्र वर्ष 2012 से संचालित है और अब तक यहां 700 से अधिक कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने की दशा में बच्चे के साथ अटेंडर के रूप में आए उसके एक परिजन को भी भोजन तथा 15 दिन तक 150 रुपये प्रतिदिन के आधार पर सहायता राशि दी जाती है।प्रत्येक पोषण पुनर्वास केंद्रों में एक चिकित्सा अधिकारी को प्रभारी तथा इसके अतिरिक्त एक फीडिंग डिमांस्ट्रेट,स्टाफ नर्स, रसोईया तथा अटेंडर के पद भी स्वीकृत किए गए हैं। जिससे यह सुचारू रूप से संचालित हो सके। कसडोल के स्टाफ हैं। विनीता टंडन,अंजली मिश्रा, विशाखा वर्मा ,कल्याणी वर्मा ,दयावन पुरैना, ताकेश्वर कर्ष जबकि पलारी केंद्र में है नंदनी साहू,अंजलि कंवर, प्रतिभा बंजारे रोशन पैकरा अपनी सेवा दे रहे हैं। कसडोल पोषण पुनर्वास केंद्र हेतु डॉ मनीष श्रेयस को प्रभारी बनाया गया है जबकि पलारी केंद्र में एनआरसी की देखरेख स्वयं खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ एफ आर निराला द्वारा की जाती है।

पलारी के विकास खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एफ आर निराला के अनुसार बच्चों में कुपोषण मुख्यतः दो प्रकार का पाया जाता है पहला सूखा रोग जिसमें शरीर की मांसपेशियां बहुत कमजोर हो जाती हैं, तथा वजन में कमी आ जाती है ,शरीर दुबला पतला हो जाता है ,हड्डियां दिखाई देने लगती हैं उम्र के अनुपात में शारीरिक वजन में कमी आ जाती है। कुपोषण का दूसरा प्रकार क्वाशियोरकर है जिसकी शुरुआत अपर्याप्त व असंतुलित भोजन से होती है इसमें हाथ पैर व पूरे शरीर में सूजन बालों का रंग फीका हो जाना तथा आसानी से उखड़ जाते हैं विटामिन ए की कमी के लक्षण जैसे आंखों में धुंधलापन तेज रोशनी में नहीं देख पाना चमड़ी के रंग में बदलाव इत्यादि प्रगट हो जाते हैं। कसडोल के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ए एस चौहान के अनुसार पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती हेतु बच्चों में कुपोषण की पहचान आंगनबाड़ी केंद्रों में मुख्यत: की जाती है इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसके लिए व्यवस्था की गई है। डॉ चौहान के अनुसार क्योंकि कुपोषित बच्चों में संक्रमण की संभावना अधिक होती है इस कारण वे बार-बार बीमार पड़ते हैं और उनके ठीक होने में लंबा समय लगता है।

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